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श्री अमर अग्रवाल के विभागों की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित : रायपुर, बिलासपुर के अलावा कोरबा और भिलाई बनेगा स्मार्ट सिटी


नगरीय प्रशासन, वाणिज्य एवं उद्योग और वाणिज्यिक कर मंत्री श्री अमर अग्रवाल के विभागों से संबंधित अनुदान मांगों को आज विधानसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। विधानसभा में इन विभागों से संबंधित अनुदान मांगों पर हुई चर्चा के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के लिए 3028 करोड़ रूपए, वाणिज्य एवं उद्योग के लिए 333 करोड़ एक लाख सोलह हजार तथा वाणिज्यिक कर विभाग के लिए 279 करोड़ 39 लाख 55 हजार रूपए की अनुदान मांगों को पारित किया।
श्री अमर अग्रवाल ने अनुदान मांगों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए दो वर्षों के भीतर प्रदेश के सभी नगरनिगमों के शतप्रतिशत घरों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की घोषणा सदन में की। उन्होंने कहा कि रायपुर और बिलासपुर भारत सरकार द्वारा घोषित 100 स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल है। इसके अलावा राज्य सरकार अपने संसाधन से कोरबा और भिलाई को भी स्मार्ट सिटी बनाएगी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की अमृत मिशन योजना के तहत अगले दो वर्षों में प्रदेश के नौ नगरनिगमों के शतप्रतिशत घरों में पेयजल की आपूर्ति की जाएगी। श्री अग्रवाल ने कहा कि हम नगरीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। निकायों की बहुत बड़ी राशि बिजली बिल जमा करने में चला जाता है। इसलिए बिलासपुर, राजनांदगांव, रायपुर, दुर्ग और भिलाई शहर को इसी वर्ष के अंत तक शतप्रतिशत एलईडी लाईट में परिवर्तित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की मंशा के अनुरूप खुले में शौच से मुक्त शहर बनाने की दिशा में गंभीरतापूर्वक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने 2017 तक प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को शतप्रतिशत खुले मेें शौच से मुक्त शहर बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को झुग्गीमुक्त शहर बनाने के लिए गरीबों को उक्त योजना के तहत आवास क्रय करने पर 4 लाख रूपए का अनुदान देगी।
नगरीय प्रशासन मंत्री ने महापौर, अध्यक्ष, पार्षद और एल्डरमेन के मानदेय तथा सत्कार भत्ता में 20 प्रतिशत बढ़ाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि महापौर को 11000 के स्थान पर 13000 रूपए मासिक मानदेय तथा सत्कार भत्ता ढाई हजार के स्थान पर 4 हजार रूपए मिलेगा। नगरनिगम के सभापति को 9 हजार के स्थान 11 हजार रूपए और सत्कार भत्ता 1400 के स्थान पर दो हजार रूपए, पार्षद और एल्डरमेन को छह हजार रूपए के स्थान पर 7500 रूपए मासिक मानदेय मिलेगा। इसी तरह  नगरपालिका परिषद के  अध्यक्ष को तीन हजार के स्थान पर 4 हजार रूपए मानदेय और 1800 के स्थान पर दो हजार रूपए का सत्कार भत्ता मिलेगा। नगरपालिका के उपाध्यक्ष को 2400 के स्थान पर 3 हजार रूपए मानदेय और सत्कार भत्ता 800 के स्थान पर 1000 रूपए प्रतिमाह मिलेगा।  नगरपालिका के पार्षद और एल्डरमेन को 1800 के स्थान पर 2500 रूप्ए प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। नगरपंचायत के अध्यक्ष के 2400 के स्थान पर तीन हजार रूपए मानदेय तथा 1100 के स्थान पर 1400 रूप्ए सत्कार भत्ता मिलेगा। नगर पंचायत के उपाध्यक्ष को 2100 के स्थान पर 2500 रूपए मानदेय और 800 के स्थान पर एक हजार रूपए सत्कार भत्ता मिलेगा। नगर पंचायतों के पार्षद और एल्डरमेन को 1400 के स्थान पर दो हजार मासिक मानदेय मिलेगा।
वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की अनुदान मांगों पर श्री अमर अग्रवाल ने कहा कि राज्य जीएसडीपी को 40 प्रतिशत हिस्सा वाणिज्य एवं उद्योग का है। प्रदेश में उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण बना है। इस वर्ष 55279 करोड़ रूपए के एमओयू हुए हैं। गुजरात के बाद सर्वाधिक पूंजी निवेश को आकर्षित वाला राज्य है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में छत्तीसगढ़ देश में चौथे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कोर सेक्टर के अलावा नान कोर सेक्टर और सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है, क्योंकि सर्वाधिक रोजगार इन्ही क्षेत्रों में है। उन्होंने कहा कि अनेक औद्योगिक पार्कों की स्थापना की जा रही है। श्री अग्रवाल ने कहा कि यह सब सरकार की सोच और नीति के कारण संभव हुआ है। छत्तीसगढ़ का पीपीपी मॉडल पर आधारित रेल कारीडोर परियोजना देश के लिए मिसाल बन गया है।
श्री अग्रवाल ने वाणिज्यिक कर विभाग की अनुदान मांगों पर कहा कि बिना राजस्व के कोई भी राज्य विकास नहीं कर सकता। वर्ष 2010 को छोड़कर पिछले दस वर्षों में वैट में कोई वृद्धि नहीं की गई, इसके बावजूद राजस्व में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि कोई जरूरी नहीं है कि राजस्व  बढ़ाने के लिए टैक्स बढ़ाया जाए बल्कि करों एवं नियमों में सरलीकरण तथा उचित प्रबंधन से भी राजस्व बढ़ाया जा सकता है। आज किसी भी व्यवसायी को अपने काम के लिए वाणिज्यिक कर के दफ्तर आना नहीं पड़ता। पूरी प्रक्रिया को ऑन लाईन कर दिया गया है। हमने ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जिसके माध्यम से आसानी से कर अपवंचन को पकड़ा जा सकता है। एक वर्ष में हमारे अधिकारी इस साफ्टवेयर के माध्यम से एक सौ करोड़ रूपए का कर अपवंचन पकड़ा है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो ने भी छत्तीसगढ़ की इस प्रक्रिया का अनुकरण अन्य राज्यों को करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि परिसम्पतियों के पंजीयन की प्रक्रिया को भी ऑन लाईन किया जा रहा है और इसे बहुत जल्द राजस्व विभाग से लिंक कर दिया जाएगा, जिससे ऑन लाईन ही नामांतरण हो सकेगा।