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राजधानी रायपुर में राज्य स्तरीय महापौर विमर्श का आयोजन : निकायों में जन सुविधाओं के विस्तार में सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर चर्चा


छत्तीसगढ़ राज्य वित्त आयोग द्वारा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सहयोग से आज यहां सिविल लाइन स्थित नवीन विश्राम भवन में राज्य स्तरीय महापौर विमर्श का आयोजन किया गया। बैठक में आयोग के अध्यक्ष श्री चंद्रशेखर साहू ने कहा कि राज्य वित्त आयोग के परामर्श से राज्य शासन द्वारा नगरीय निकायों और पंचायतों को राशि दी जाती है। इसके लिए सबसे पहले नगरीय निकायों की जरूरतों और कठिनाइयों को समझना जरूरी है। इसी उद्देश्य से पहले चरण में नगर निगमों के महापौर, सभापति, नेताप्रतिपक्ष से विचार-विमर्श का आयोजन किया गया है। यहां से प्राप्त सुझावों के आधार पर आयोग अपना प्रतिवेदन राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगा। श्री साहू ने नगर निगमों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से कहा कि वे अपने सुझाव आयोग की वेबसाइट, ई-मेल के माध्यम अथवा आयोग कार्यालय के पते पर भेज सकते हैं। इस अवसर पर पूर्व मुख्य सचिव श्री एस के मिश्रा ने अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है, जनसुविधाओं में वृद्धि के लिए नगरीय निकायों को तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि निकायों की आय बढ़ाने राज्य सरकार द्वारा नगरीय राजस्व नियामक आयोग की परिकल्पना की गई है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के विशेष सचिव डॉ. रोहित यादव ने केंद्र एवं राज्य प्रवर्तित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मिशन अमृत के तहत राज्य के एक लाख से अधिक आबादी के नौ शहरों-रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव, अंबिकापुर, जगदलपुर, रायगढ़ एवं कोरबा में 2119 करोड़ रुपए की कार्ययोजना तैयार की गई है इसके तहत पाइप लाइन के माध्यम से सभी घरों में पानी पहुंचाना पहली प्राथमिकता है। इस मिशन के तहत पैदल मार्ग, सार्वजनिक परिवहन सुविधा, भूमिगत सीवरेज अथवा सेप्टेज मैनेजमेंट पर प्रमुखता से काम करना है।
बैठक में नगर निगमों में जन सुविधाओं के विस्तार में सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर विस्तृत चर्चा हुई। इस अवसर पर वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के विशेष सचिव श्री व्ही.के. छबलानी ने सार्वजनिक निजी भागीदारी (पी.पी.पी.) मॉडल पर प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की कार्यकुशलता, दक्षता एवं तकनीकी प्रबंधन का उपयोग कर नगरीय निकाय अपनी आय का स्त्रोत बढ़ा सकते हैं। इससे सीमित बजट संसाधनों से वृहद अधोसंरचना का निर्माण किया जा सकता है। प्रस्तुतिकरण के जरिए बताया कि नगरीय निकाय सार्वजनिक निजी भागीदारी से सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था, जल आवर्धन, नल-जल, मीटर बिलिंग, ठोस अवशिष्ट प्रबंधन, सार्वजनिक शौचालय, उद्यान निर्माण, पार्किंग व्यवस्था, मनोरंजन क्षेत्र का विकास, ई-रिक्शा, सौर ऊर्जा संयत्र, संचार व्यवस्था को कम लागत में बेहतर बना सकते हैं। बैठक में वित्त आयोग के सदस्य श्री नरेशचन्द्र गुप्ता, महापौर नगर निगम रायपुर श्री प्रमोद दुबे, बीरगांव की श्रीमती अंबिका यदु, धमतरी की श्रीमती अर्चना चौबे, दुर्ग की श्रीमती चंद्रिका चंद्राकर, भिलाई के देवेन्द्र यादव, राजनांदगांव के श्री मधुसूदन यादव, जगदलपुर के श्री जतिन जायसवाल, रायगढ़ की मधुबाई, अम्बिकापुर के डॉ. अजय कुमार तिर्की और चिरमिरी के श्री के. डोमरू रेड्डी सहित संबंधित नगर निगमों के सभापति और नेता प्रतिपक्ष उपस्थित थे।