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हर घर शौचालय – हर घर नल : खुले में शौच मुक्ति की ओर कारगर कदम


छत्तीसगढ़ के  सभी 168 नगरीय निकायों को ‘’खुले में शौच मुक्त’’ ओ.डी.एफ) करने के लिए प्रदेश सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर घर शौचालय –हर घर नल योजना की शुरुआत की है . 02 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन के साथ शुरू प्रदेश की इस  योजना को भारत सरकार द्वारा इनोवेटिव प्रेक्टिस के रूप में निरूपित किया गया है . प्रदेश में चल रहे व्यापक अभियान के तहत अब तक 168 शहरों में 82 हजार से अधिक निजी शौचालयों का निर्माण पूरा हो चुका है . शहरों में निजी शौचालय निर्माण में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी है . प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी प्रदेश में इस योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए प्रदेश सरकार की सराहना की है .
इस योजना की खास बात ये है कि जिओ टैग तकनीक के माध्यम से इसकी निगरानी की जा रही है जिसमे प्रत्येक शौचालय के निर्माण के बाद उसका चित्र भारत सरकार के सर्वर पर अपलोड करना अनिवार्य है .  इस तकनीक के उपयोग के कारण योजना में गड़बड़ी की संभावना नहीं के बराबर है. निकायों और संचालनालय नगरीय प्रशासन और विकास के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए राज्य शहरी विकास अभिकरण (सुडा) ने स्वयं अपने विशेषज्ञों के माध्यम से एक मोबाइल आधारित  सॉफ्ट वेयर का निर्माण किया है जिसके माध्यम से नगरीय निकायों के अभियंता शौचालय निर्माण के बाद उसकी गुणवत्ता का परीक्षण किया जाता है .उसके बाद मोबाइल के माध्यम से फोटो लेकर उसे साफ्ट वेयर के माध्यम से सर्वर में डाल दिया जाता है . इन चित्रों को सुडा के विशषज्ञ फिर भारत सरकार के सर्वर में अपलोड कर देते  हैं.
इस योजना का उद्देश्य प्रदेश खुले में शौच को समाप्त करने के लिए निजी और सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करना . अस्वच्छ शौचालयों को फ्लश शौचालय में परिवर्तित करना , मैला ढ़ोने की प्रथा का उन्मूलन करना और स्वास्थ्य  एवं स्वच्छता से जुड़ीं प्रथाओं के संबंध में लोगों के व्यवहार में परिवर्तन लाना हैं।. इस योजना की खास बात ये है कि हितग्राहियों के घरों में शौचालय निर्माण के साथ ही उन्हें  भागीरथी नल जल योजना के तहत निःशुल्क नल कनेक्शन भी दिया जा रहा है . योजना के तहत एक शौचालय निर्माण में 20 हजार तक की राशि व्यय की जा रही है .जिसमे से  केंद्र सरकार द्वारा 4 हजार प्रति शौचालय की राशि उपलब्ध करायी जा रही है जबकि राज्य सरकार द्वारा प्रति शौचालय 14 से 15 हजार रुपए का व्यय किया जा रहा है . उल्लेखनीय है कि देश भर में छत्तीसगढ़ प्रदेश ऐसा  है जहाँ राज्यांश के तौर पर अन्य राज्यों के अपेक्षा अधिक धनराशि व्यय की जा रही है . हितग्राहियों का अंशदान नगर निगमों  में 2 हजार ,नगर पालिकाओं में 15 सौ और नगर पंचायतों में एक हजार रूपए है. शौचालय निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया को सरल कर एक हजार 410 एजेंसियों को सूचीबद्ध किया गया है . हितग्राही के पास यह विकल्प मौजूद है कि वह अपने घर में स्वयं या निकाय द्वारा सूचीबद्ध एजेंसी से शौचालय निर्माण करवा सकता है.