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दीनदयाल अन्त्योदय योजना : ढोकरा कला समूह की आय हुई छः माह में ही दोगुनी


शासन द्वारा शहरी क्षेत्रों में गरीबों के हित में चलाए जा रहे दीनदयाल अन्त्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन से ढोकरा शिल्प कला स्व-सहायता समूह कोण्डागांव की आय छह माह में ही दो गुनी हो गई है। कोण्डागांव जिले के भेलवांपदर वार्ड में एक अप्रैल 2016 को बस्तरिया ढोकरा शिल्प कला समूह का गठन हुआ था। गठन के पूर्व इस समूह की महिलाएं मूर्तियां अलग-अलग बनाती थी। दीनदयाल अन्त्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत आपस में इन्हें जोड़कर समूह बनाया गया। समूह बनाने के पश्चात इन्हें योजना से होने वाले फायदे से अवगत कराया गया। समूह की महिलाओं को अपनी गतिविधियों के अच्छे से संचालन के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया। छः माह के पश्चात समूह द्वारा पंच-सूत्र का पालन करने और अच्छे समूह होने के कारण 10 हजार रूपए का चक्रीय निधि प्रदान किया गया। इसके उपरांत उन्हें समूह ऋण लेने के लिए प्रेरित किया गया। समूह की आपसी सहमति होने पर स्थानीय बैंक से तीन लाख रूपए का ऋण प्रदान किया गया, ताकि समूह अपने व्यवसाय को उत्तरोतर बढ़ा सके।
समूह की महिलाओं ने बताया कि योजना से जुड़ने पर हमें बहुत फायदा हो रहा है। पहले हम लोग अलग-अलग मूर्तियां बनाकर भेजते थे, जिससे महीने में चार हजार मिलता था। अब समूह बनाकर बेचते हैं तो महीने में आठ हजार रूपए तक कमा लेते हैं। इसके अलावा अपनी मूर्तियों को शबरी एम्पोरियम कोण्डागांव तथा जगदलपुर में भी भेजने की सुविधा मिल गई है। इस तरह योजना के तहत मिल रही सुविधाओं से हमें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिल रही है। ढोकरा शिल्प कला स्व-सहायता समूह द्वारा सल्फी पेड़, माड़िया-माड़िन, कछुआ, पेपर वेट, स्टैण्ड, बड़ी मूर्ति, घोड़ा, हाथी तथा विभिन्न प्रकार की बेल मेटल की मूर्तियां समूह द्वारा बनाई जाती है। यह जानकारी राज्योत्सव के अवसर पर नया रायपुर में नगरीय प्रशासन विभाग की प्रदर्शनी में ढोकरा शिल्प कला समूह द्वारा दी गई।