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बोगस बिल जारी करने वाले व्यवसायियों पर कड़ी कार्रवाई


वाणिज्यिक-कर मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने बोगस बिल जारी करने वाले व्यवसायियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। श्री अग्रवाल ने कल वाणिज्यिक कर की तिमाही समीक्षा बैठक में कहा कि प्रवर्तन शाखा ऐसे सभी प्रकरणों की तीस सितम्बर तक जांच पूरी कर बकाया राशि की वसूली प्राथमिकता से करे। उल्लेखनीय है कि बोगस बिल जारी करने वाले 29 व्यवसाईयों के विरूद्ध पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। वाणिज्यिक कर आुयक्त श्री आर.एस. विश्वकर्मा ने बैठक में बताया कि कर अपवंचन की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए मुख्यालय में बिजनेस इंटेलिजेंस विन्ग की स्थापना की गई है। इस विंग द्वारा प्रदेश के व्यवसायियों द्वारा जमा किए गए त्रैमासिक विवरण पत्र एवं वार्षिक विवरण फार्म-18 में दी गई जानकारी का प्रतिसत्यापन कर प्रारंभिक चरण में 30 ऐसे व्यवसायियों की जानकारी निकाली गई है, जिनके द्वारा प्रस्तुत किए गए विवरण पत्रों में नाम मात्र की बिक्री दर्शायी गई है या विवरण पत्र प्रस्तुत नहीं किए गए हैं, किन्तु विक्रेताओं द्वारा इनसे काफी बड़ी मात्रा में खरीदी दर्शाकर आगत कर में छूट (इनपुट टैक्स रिबेट) हेतु दावा किया गया है। इन 30 व्यवसायियों से क्रेताओं द्वारा लगभग चार सौ करोड़ रूपए की खरीदी विगत तीन-चार वर्षों में दर्शायी गई है। सत्यापन करने पर यह पाया गया कि ऐसे विक्रेता व्यवसायियों का वास्तव में कोई अस्तित्व नहीं है एवं कई व्यवसायियों का पंजीयन प्रमाण पत्र भी निरस्त किया जा चुका है। वर्तमान में बोगस अथवा संदिग्ध बिल जारी करने वाले व्यवसायियों की संख्या 64 है तथा इनके क्रेता व्यवसायियों की संख्या लगभग सात सौ और बोगस विक्रय राशि लगभग 600 करोड़ रूपए हो चुकी है। श्री विश्वकर्मा ने बताया कि इन प्रकरणों में 25 करोड़ रूपए से अधिक का गलत इनपुट टैक्स रिबेट क्लेम करते हुए कर अपवंचन किए जाने तथा बोगस बिल जारी कर धोखाधड़ी किए जाने के कारण 29 व्यवसायियों के विरूद्ध सिविल लाइन थाना तथा देवेन्द्र नगर थाने में एफ.आई.आर. दर्ज की गई है। क्रय किए जाने वाले माल में मुख्य रूप से कोयला, आयरन स्टील, फ्यूल आइल, पैडी हस्क, लौह अयस्क और आयरन स्क्रेप आदि हैं। विभाग द्वारा ऐसे प्रकरणों में क्रेताओं के कर निर्धारण प्रकरण की धारा 22 के तहत पुनः निर्धारण की कार्रवाई प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है।