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छत्तीसगढ़ में नौनिहालों की अच्छी सेहत के लिए ‘चिरायु योजना’


छत्तीसगढ़ में नौनिहालों की अच्छी सेहत के लिए राज्य सरकार ने चिरायु परियोजना चलाकर ठोस पहल की है। योजना की शुरूआत 15 अगस्त 2014 को हुई और एक वर्ष के अंतराल में चिरायु परियोजना के तहत 56 लाख 87 हजार बच्चों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में सरकार ने स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल किया है। राज्य में बच्चों की सेहत का स्तर बनाने के लिए अनेक योजनाएं चलायी जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह के भागीरथी प्रयासों का ही परिणाम है कि अच्छी सेहत के साथ राज्य के बच्चे आज हर क्षेत्र में प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। बहुत ही कम समय में इस योजना के उत्साह जनक परिणाम सामने आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह का मानना है कि राज्य के बच्चों की सेहत अच्छी होने पर ही राज्य भी स्वस्थ रहेगा। चिरायु योजना में 0 से 18 वर्ष तक के सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर जरूरत के अनुसार उपचार की सुविधा दी जाती है। योजना के क्रियान्वयन के लिए प्रदेश के सभी 146 विकासखंडों में 292 मोबाईल मेडिकल यूनिट दिए गए हैं। मोबाईल मेडिकल यूनिट के माध्यम से प्रत्येक विकासखंड के चिन्हांकित स्कूलों और आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों की सेहत की जांच और तुरंत उपचार की सुविधा दी जा रही है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित इस योजना में आंगनबाड़ी के बच्चों का साल में दो बार और स्कूली बच्चों का साल में एक बार स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। योजना में 30 बीमारियों का चिन्हांकन किया गया है। इन बीमारियों में रक्ताल्पता, विटामिन ए की कमी, विटामिन डी की कमी, अति कुपोषित बच्चे, घेंघा, थॉयराईड विकार, त्वचा संबंधी रोग, जन्मजात मोतियाबिंद, जन्मजात हदय रोग, कान संक्रमण, श्वसन तंत्र रोग, दमा, टीबी, दंत रोग, मिर्गी संबंधी विकार, दृष्टि दोष, सुनने में परेशानी, मंासपेशियों में विकार, वाणी और भाषा में देरी जैसी बीमारियां  शामिल हैं, जिनका परीक्षण कर उपचार किया जाता है।
योजना के क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक विकासखंड में दो चिरायु दल गठित किए गए हैं। प्रत्येक दल में एक महिला व एक पुरूष आयुष चिकित्सक, एक फार्मसिस्ट एवं एक ए.एन.एम है। यह दल गांव-गांव में जाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करता है। परीक्षण उपरांत जिन्हें अधिक उपचारों की आवश्यकता है, उन्हें रिफर कर आर.बी.एस के अंतर्गत निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाता है। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाने का काम भी यह दल बखूबी कर रहा है।
परियोजना के सफलतापूर्वक संचालन के लिए जिला और विकासखंड स्तर पर समिति गठित की गयी है। जिला स्तरीय समिति कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित की गयी है। इस समिति पर जिला स्तर पर परियोजना के संचालन की समस्त जिम्मेदारी होती है। इसी प्रकार विकासखंड स्तरीय समिति पर विकासखंड की जवाबदारी होती है। यह समिति दूसरे विभागों से समन्वय स्थापित कर कार्यक्रम की निगरानी और समीक्षा करती है। इसके साथ ही मोबाईल मेडिकल टीम के भ्रमण कार्यक्रम का परीक्षण कर समय-सारणी का अनुमोदन करना, छात्रों की स्क्रीनिंग पश्चात रिफरल हेतु आवश्यक सुविधाओं को चिन्हित करना और ऐसे मामलों की समीक्षा करते हुए निःशुल्क उपचार की व्यवस्था कराना भी इनके कार्यक्षेत्र में आता है। समय-समय पर रिफरल किए गए मरीजों का ए.एन.एम और मितानिनों के माध्यम से फॉलोअप कराना भी इस समिति का ही दायित्व है।
परियोजना के तहत बीमारियों को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है। श्रेणी ’’ए’’ में ऐसी बीमारियों को शामिल किया गया है जिनके ईलाज हेतु अति विशेष सुविधा एवं चिकित्सक आवश्यक है। ऐसी बीमारियों के ईलाज के लिए शासकीय तथा निजी अस्पताल चिन्हांकित किए गए हैं। इस श्रेणी में न्यूरल ट्यूब दोष, होंठ एवं तालू की विकृति, पैर की विकृति, जन्मजात मोतियाबिन्द, जन्मजात बधिरता, जन्मजात ह्दय रोग, जन्मजात रेटिना संबंधी विकार शामिल है। दूसरी श्रेणी में आने वाली बीमारियों का ईलाज राज्य के शासकीय चिकित्सालयों में किया जाता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में प्रत्येक गुरूवार को चिरायु दिवस मनाया जाता है। इस दिन चिरायु दल द्वारा चिन्हांकित बच्चों की जांच और उपचार निःशुल्क किया जाता है। इस श्रेणी में घेंघा, थॉयराईड विकार, त्वचा संबंधी विकार, कान का संक्रमण, श्वसन तंत्र विकार,दंत रोग, मिर्गी संबंधी विकार, दृष्टि दोष, सुनने में परेशानी और मांसपेशियों में विकार शामिल है। श्रेणी ’’सी’’ के अंतर्गत आने वाली बीमारियों में मुख्यतः किसी न किसी पोषक तत्व की कमी से होनी वाली बीमारियां जैसे रक्तअल्पता, विटामिन ए की कमी, विटामिन डी की कमी, कुपोषण को शामिल किया गया है। चौथी श्रेणी में शारीरिक अक्षमताओं, जन्म से शारीरिक और मानसिक वृद्धि में कमी आदि को शामिल किया गया है। इस श्रेणी की बीमारियों के लिए 6 जिलों अंबिकापुर, रायगढ़, रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और बस्तर में क्म्प्ब्  की स्थापना की गयी है। इसके अतिरिक्त समाज कल्याण विभाग द्वारा जिले में स्थापित जिला पुर्नवास केन्द्र और स्पेशल स्कूल के माध्यम से बच्चों का पुनर्वास और जीवन शैली में परिवर्तन किया जाता है। प्रत्येक कक्षा में अध्ययनरत बच्चे के लिए स्नेह कार्ड बनाया जाता है। योजना के क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक विभाग को अलग- अलग दायित्व दिए गए हैं। इनमें स्कूल शिक्षा विभाग, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग शामिल हैं। चिन्हांकित बच्चों के ईलाज के लिए समय-समय पर शिविरों का आयोजन भी किया जाता है।


 

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ध्वनि विस्तारक यंत्रों तथा डीजे का मनमाना इस्तेमाल अब नहीं होगा : ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम के लिए जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी


सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर अत्यधिक शोर मचाने वाले ध्वनि विस्तारक यंत्रों तथा डीजे का मनमाना इस्तेमाल अब प्रदेश में नहीं हो सकेगा। राज्य सरकार ने ध्वनि प्रदूषण की समस्या को गंभीरता से लिया है। इस सिलसिले में आवास और पर्यावरण विभाग ने कल यहां मंत्रालय (महानदी भवन) से राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को परिपत्र जारी किया है।
आवास एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव श्री अमन कुमार सिंह द्वारा जारी परिपत्र में जिला कलेक्टरों को जिलों में ध्वनि प्रदूषण से संबंधित शिकायतों को दर्ज करने के लिए एक शिकायत केन्द्र की स्थापना करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें प्रत्येक केन्द्र में एक जिम्मेदार अधिकारी तैनात करने और प्राप्त शिकायतों का त्वरित निराकरण करने के लिए भी कहा गया है। जिला कलेक्टरों को जिले में ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए दण्डाधिकारियों, पुलिस और होम गार्डस के माध्यम से लगातार मॉनिटरिंग और पेट्रोलिंग करने तथा नियम का पालन सुनिश्चित करवाने और ध्वनि प्रदूषण से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में व्यापक प्रचार-प्रसार के जरिए जन-जागरण के लिए भी कहा गया है।
परिपत्र में बताया गया है कि केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा ध्वनि प्रदूषण (नियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 अधिसूचित किए गए हैं। ये नियम 14 फरवरी 2000 से प्रभावशील हैं। नियमों से संबंधित प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करवाने के लिए जिला कलेक्टर, पुलिस कमिश्नर एवं संबंधित नियमों के परिपालन हेतु उप पुलिस अधीक्षक श्रेणी के अधिकारी को विहित प्राधिकारी बनाया गया है। नियम-8 के प्रावधान में विहित प्राधिकारी को किसी लाउडस्पीकर, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, हॉर्न, निर्माण उपकरणों और अन्य ध्वनि उत्पन्न करने वाले उपकरणों आदि को प्रतिबंधित करने की शक्तियां दी गयी है।
आवास एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव श्री अमन कुमार सिंह ने परिपत्र में कहा है कि राज्य शासन के ध्यान में यह तथ्य आया है कि ध्वनि विस्तारक उपकरणों के बढ़ते उपयोग के कारण परिवेशीय वायु में निर्धारित ध्वनि स्तर के मानकों को उल्लंघन हो रहा है और बढ़ता ध्वनि प्रदूषण जन-साधारण के लिए विभिन्न प्रकार की समस्याओं का कारण भी बन रहा है। परिपत्र के अनुसार राज्य शासन को यह समाधान हो गया है कि प्रदेश की परिवेशीय वायु में निर्धारित ध्वनि स्तर के मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए ध्वनि प्रदूषण (नियमन एवं नियंत्रण) नियम 2000 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है। प्रमुख सचिव श्री सिंह ने परिपत्र में यह भी निर्देश दिए है कि इस नियम के प्रावधानों के अनुसार लाउडस्पीकर, पब्लिक एड्रेस सिस्टम का उपयोग जिला दण्डाधिकारी या अन्य सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति के बिना नहीं किया जाए। रात्रि दस बजे से सवेरे छह बजे के बीच खुले में लाउडस्पीकर, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, ध्वनि उत्पन्न करने वाले उपकरण, संगीत उपकरण, ध्वनि विस्तारक यंत्र, ड्रम या टॉम-टॉम अथवा ट्रमपैट, पीटने या ध्वनि उत्पन्न करने वाले किसी भी उपकरण के उपयोग की अनुमति नहीं दी जाए। परिपत्र में यह भी कहा गया है कि ध्वनि प्रदूषण (नियमन एवं नियंत्रण) नियम 2000 के प्रावधानों के अनुसार यह सुनिश्चित किया जाए कि जिस सार्वजनिक स्थान पर लाउडस्पीकर, पब्लिक एडेªेस सिस्टम या अन्य ध्वनि उत्पन्न करने वाले स्त्रोत का उपयोग हो रहा है तो उसकी सीमा पर ध्वनि स्तर निर्धारित परिवेशीय ध्वनि स्तर की सीमा से दस डी.बी. (ए) अथवा 75 डी.बी. (ए), जो भी कम हो, उससे अधिक नहीं होना चाहिए। इस नियम के प्रावधानों के अनुसार यह भी सुनिश्चित किया जाए कि निजी क्षेत्र में साउण्ड सिस्टम अथवा अन्य ध्वनि उत्पन्न करने वाले उपकरण के उपयोग के कारण उस निजी क्षेत्र की सीमा पर ध्वनि का स्तर निर्धारित सीमा से पांच डी.बी. (ए) से अधिक नहीं होनी चाहिए। शान्त क्षेत्र में अथवा रात्रि में रहवासी क्षेत्र में हॉर्न का उपयोग आपात कालीन परिस्थितियों के अलावा नहीं किया जाए। प्राधिकारी को समस्याओं के निवारण के लिए किसी लाउडस्पीकर, पब्लिक एडेªस सिस्टम, अन्य ध्वनि उत्पन्न करने वाले उपकरण, डी.जे. सिस्टम आदि के उपयोग को प्रतिबंधित, नियंत्रित अथवा नियमित करना जरूरी हो तो उन्हें इसके लिए ध्वनि प्रदूषण (नियमन एवं नियंत्रण) नियम 2000 के प्रावधानों के अनुसार तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करनी होगी।
परिपत्र में सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 1998 और वर्ष 2005 में भी दो याचिकाओं का निराकरण करते हुए ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पारित आदेश और भोपाल स्थित राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (नेशलन ग्रीन ट्रिब्यूनल) की सेन्ट्रल जोनल बेंच द्वारा एक प्रकरण में ध्वनि प्रदूषण के संबंध में चिन्ता प्रकट करते हुए 14 अक्टूबर 2015 को पारित आदेश का भी संदर्भ दिया गया है।


 

राज्य शासन ने जारी किये पार्षद निधि के अंतर्गत कराए जाने वाले कार्य संबधी निर्देश


राज्य शासन ने नगरीय निकायों को मिलने वाली पार्षद निधि के अंतर्गत कराए जाने वाले कार्यों के सम्बन्ध में सभी नगर निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं।नगरीय प्रशासन और विकास विभाग द्वारा मंत्रालय (महानदी भवन) से जारी पत्र में निर्देशित किया गया है कि पार्षद निधि के तहत नगरीय निकायों में पाइपलाइन विस्तार ,नवीन सीमेंट कांक्रीट  रोड सहित नाली निर्माण ,सांस्कृतिक /सामुदायिक/सार्वजनिक  भवनों के संधारण और भवन में नवीन सुविधाओं की व्यवस्था ,शासकीय शालाओं में विद्यार्थियों की बैठक व्यवस्था हेतु फर्नीचर क्रय , शासकीय और अनुदान प्राप्त शालाओं के उद्यानों में बेंच ,कुर्सी तथा फिसलपट्टी आदि की खरीदी ,छोटे उद्यान का निर्माण ,वार्ड में उपयुक्त स्थान मिलने पर स्कूली बच्चों और आम नागरिको  के लिए बस स्टाप का निर्माण ,घर-घर जाकर कचरा इकठ्ठा करने के लिए ऑटो रिक्शा और डस्ट बीन की खरीदी , मूत्रालय का निर्माण , मुक्तिधाम के उन्नयन का कार्य ,छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत् मंडल के माध्यम से बिजली का खम्बा एवं विद्युत् लाइन विस्तार तथा विद्युत् खम्बे एवं ट्रांसफार्मर के स्थान परिवर्तन(शिफ्टिंग )का कार्य और व्यायाम शाला (जिम ) के लिए आवश्यक सामग्री की खरीदी का कार्य कार्य जा सकता है । निर्देश में कहा गया है  कि व्यायाम शाला का संचालन और संधारण स्थानीय युवकों द्वारा गठित समिति द्वारा निर्धारित शुल्क वसूली की शर्त पर किया जायेगा ।


 

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‘‘कचरे से सोना’’ का सपना हुआ साकार : प्लास्टिक कचरे की पहली खेप 2.11 लाख की


नगरीय क्षेत्रों में कचरे का निपटारा एक बड़ी समस्या है। प्रतिदिन शहर से निकलने वाले हजारों टन कचरे का निपटारा कहां करें ? कैसे करें कि उस कचरे के बिखरने अथवा सड़ने से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके अथवा खत्म किया जा सके। इन्हीं बातों को दृष्टिगत रखकर सरगुजा कलेक्टर श्रीमती ऋतु सैन के मार्गदर्शन में नगर पालिक निगम अम्बिकापुर में अभिनव पहल करते हुए ठोस, तरल अपशिष्ठ प्रबंधन केन्द्रो का संचालन प्रारंभ किया गया। नगर निगम अम्बिकापुर के पास वर्तमान में 90.06 टन रिसायकल सामग्री का संग्रहण किया जा चुका है। अम्बिकापुर के डी.सी. रोड स्थित ठोस, तरल अपशिष्ठ प्रबंधन केन्द्र मंे कचरे के तीसरे चरण के पृथक्करण के पश्चात आज ्8 टन कचरा नगर के व्यापारी श्री काशीनाथ साह को विक्रय किया गया। इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने कचरे से लदे ट्रक को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। इस प्रकार अम्बिकापुर छत्तीसगढ़ का पहला नगरीय निकाय है, जहां ठोस, तरल प्रबंधन केन्द्रों के संचालन के माध्यम से कचरे का निपटारा किया जा रहा है।

एस.एल.आर.एम केन्द्र की शुरूआत
14 अप्रैल 2015 को निगम क्षेत्र के केनाबांध वार्ड में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति मे पहले एस.एल.आर.एम. केन्द्र का शुभारंभ हुआ। घर से घर से कचरा संग्रहित कर केन्द्र तक लाने, कचरे का सामग्री की प्रकृति के आधार पर पृथक्करण करने, शोधन करने एवं साफ किये हुए कचरे को बेचने के इस परियोजना मंे आज दो टन शोधित प्लास्टिक कचरे को 2 लाख 11 हजार रूपये विक्रय किया गया। इस प्रकार प्रदूषण एवं संक्रमण का कारण बनने वाला कचरा आमदनी का स्त्रोत बन गया है। इस प्रकार नगर के लोगो का ‘‘कचरे से सोने’’ का सपना साकार हो गया है। ठोस,तरल अपशिष्ठ प्रबंधन केन्द्रों के संचालन से गलियों, सड़कों एवं नालियों में जहां कचरा गायब हो गया है, वहीं डम्पिंग यार्ड मे भी कूड़ों का ढेर नही लग रहा है, जिससे शहर की सफाई सुनिश्चित हो रही है।

कचरा प्रबंधन का कारगर तरीका, शासन का मिला सहयोग
विधान सभा के नेता प्रतिपक्ष एवं स्थानीय विधायक श्री टी.एस. सिंह देव ने इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कचरा प्रबंधन का यह तरीका बेहद कारगर है। उन्होंने कहा कि कचरा प्रबंधन के इस कार्य के प्रारंभ मे लोगो के मन अनेक प्रकार की आशंकाएं एवं कुशंकाएं व्याप्त थी, किन्तु अब इस प्रबंधन द्वारा बुनियादी सफलता के प्रथम चरण को पार कर लिया गया है तथा लोगों की शंकाएं दूर हो गई हैं। उन्होंने इस प्रबंधन के आधारभूत संरचनाओं हेतु राज्य शासन द्वारा  शीघ्र एवं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराये गये आबंटन की प्रशंसा करते हुये कहा कि सही समय पर राशि प्राप्त होने के कारण ही निगम क्षेत्र में 17 एस.एल.आर.एम. केन्द्रो का संचालन सुनिश्चित हो सका है। उन्होंने कलेक्टर श्रीमती ऋतु सैन सहित नगर निगम के जनप्रतिधियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई प्रेषित करते हुए इस कार्य को भविष्य मे भी पूरे लगन एवं समन्वय से जारी रखने का आह्वान किया।

आशंकाएं निराधार, मिली सफलता
महापौर डॉ. अजय तिर्की ने अपने संबोधन मे कहा कि केन्द्रों के संचालन के प्रारंभ मे लोगो के मन में जो आशंकाए व्याप्त थीं, वह अब पूरी तरह से समाप्त हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि हमें अब इस प्रबंधन को जारी रखते हुए सफलता के नये सोपान तय करने हैंं। निगम के सभापति श्री शफी अहमद, पार्षद श्री हेमन्त सिन्हा, श्री आलोक दुबे, श्री द्वितेन्द्र मिश्र एवं श्री मधुसूदन शुक्ला ने भी प्रबंधन केन्द्र के संचालन में लगे अधिकारियों-कर्मचारियों एवं महिलाओं के कार्यो की प्रशंसा करते हुए इस सफलता के लिए बधाई दी।

आत्ममुग्ध न होकर करें दायित्वों का निर्वहन
कलेक्टर श्रीमती ऋतु सैन ने कहा कि कचरा प्रबंधन के इस कार्य का प्रमुख लक्ष्य शहर की साफ-सफाई है। उन्होंने कहा कि जिन कचरो का संग्रहण एवं पृथक्करण कर हम आज विक्रय कर रहे है, वह कूड़ा निश्चित रूप से शहर की सड़कों, नालियों अथवा डम्पिंग यार्ड में बिखरा हुआ अथवा सड़ता हुआ मिलता। इस प्रबंधन से यह कचरा आय का स्त्रोत बन रहा है, साथ ही सफाई भी सुनिश्चित हो रही है। उन्होंने कहा कि कचरे को शोधित कर बेचने की इस पहली सफलता से कार्यकर्ता आत्ममुग्ध न हो जायें, अपितु निर्धारित कार्यो को सही समय पर करते हुए अपने शहर को साफ सुथरा रखने एवं अन्य शहरों के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाहन करें। उन्होंने कचरा प्रबंधन के इस कार्य में सफलता के लिए जनप्रतिनिधियों, नगर निगम के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा कार्यरत महिला सदस्यों की प्रशंसा करते हुए एस.एल.आर.एम. केन्द्र को उद्देश्यों के अनुरूप संचालित करने का आग्रह किया।

17 एस.एल.आर.एम. का संचालन
निगम के आयुक्त डॉ. एल.के.सिंगरौल ने बताया है कि निगम क्षेत्र में 17 एस.एल.आर.एम. केन्द्रों का संचालन किया जा रहा है। इन केन्द्रो में अब तक 90.06 टन रिसायकल सामग्री का संग्रहण किया जा चुका है। आगामी सप्ताह मे बची हुई सामग्री का विक्रय किया जायेगा। यूजर चार्ज के तहत जून 2015 से अब तक 4 लाख 12 हजार 905 रूपये प्राप्त हुये हैं। संग्रहित कचरे को 104 प्रकारों में अलग-अलग कर विक्रय हेतु तैयार किया गया है। वर्तमान में शहर के 10 वार्डो में प्रत्येक घर तक पहुॅचकर कचरों का संग्रहण किया जा रहा है, अन्य वार्डो में भी कचरा संग्रहण का कार्य किया जा रहा है। सभी घरों तक कचरा संग्रहण करने वाली महिलाओं की पहुॅच शीघ्र ही प्रारंभ होगी। इस कार्य मे 34 मानव चलित रिक्शा एवं 6 बैटरी चलित रिक्शा का उपयोग किया जा रहा है। इन 17 केन्द्रों में 193 महिला कार्यकर्ता 38 सुपरवाईजर एवं 9 कोर मेम्बर कार्यरत हैं। इस अवसर पर वार्ड की पार्षद श्रीमती विमला यादव, श्री शफीक खान, श्री फारूख मोहम्मद, श्री इन्दरजीत सिंह धंजल, श्रीमती सावित्री सारथी, श्री यू.एस.सिंहदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक, निगम के कार्यपालन अभियंता श्री प्रमोद दुबे, एनयूएलएम की मैनेजर श्रीमती शिल्पा पाण्डेय, स्वच्छ अम्बिकापुर मिशन सहकारी समिति की महिला सदस्य उपस्थित थीं।


 

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राजभवन में क्रिसमस की खुशियां बिखरीं : कैरोल सिंगिंग कार्यक्रम आयोजित


प्रभु यीशु मसीह के जन्मोत्सव (क्रिसमस) के आगमन का संदेश लेकर आज राजभवन में केपिटल पास्टर्स फेलोशिप रायपुर के सदस्यों ने कैरोल सांग का गायन किया।

इस अवसर पर राज्यपाल श्री बलरामजी दास टंडन ने प्रदेशवासियों को क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं एवं सभी के सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि क्रिसमस का यह पर्व सबसे प्रेम और सबकी सहायता का संदेश लेकर आता है। हमारे देश की मिट्टी में अनेकता में एकता का स्वाभाविक गुण है। रास्ते अलग-अलग हैं, लेकिन मंजिल एक ही है। क्रिसमस का यह सच्चा संदेश है कि हम सभी के मन में अधिक से अधिक सेवा का भाव हो। इस अवसर पर केपिटल पास्टर्स फेलोशिप रायपुर के चेयरमेन फादर मार्क रोड्रिक्स ने प्रभु यीशु मसीह की स्तुति करते हुए कहा कि उन्होंने सबको मानवता की राह दिखाई और हम सभी को एकता के सूत्र में बांधा है। उन्होंने पवित्र बाईबिल से प्रभु यीशु मसीह के जन्म की कथा सुनाई और इस दिन का महत्व बताया। इस अवसर पर पास्टर थामस मेनन, अनूप फिलिप, अनिल कुमार ने प्रदेश के सभी नागरिकों के स्वस्थ जीवन और खुशहाली के लिए प्रार्थना की।

इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव श्री सुनील कुजूर, केपिटल पास्टर्स फेलोशिप रायपुर के डॉक्टर सिमोन पतरस, राजू वी. जॉन, अशोक कुमार, धरमू दुर्गा, धनेश्वर तुरकने, बीनू महानंद, उग्रसेन नायक एवं संस्था के अन्य सदस्यगण तथा राजभवन के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। इस अवसर पर राज्यपाल श्री टंडन को पवित्र बाईबल की प्रति भेंट की गई।


 

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छत्तीसगढ़ की झांकी गणतंत्र दिवस के लिए चयनित – संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ पर आधारित झांकी


छत्तीसगढ़ राज्य की झांकी एक बार फिर आगामी गणतंत्र दिवस पर नई दिल्ली के राजपथ पर Continue reading

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जशपुर जिले की जनता को लगभग 68 करोड़ के विकास कार्यो की सौगात


मुख्यमंत्री डॉं रमन सिंह 12 दिसम्बर को जशपुर जिले के बगीचा विकासखण्ड के ग्राम पण्डरापाठ में आयोजित विशाल आदिवासी सम्मेलन एवं वृहद स्वास्थ्य शिविर में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री वहां जशपुर जिले की जनता को लगभग 67 करोड़ 69 लाख रूपये के विकास कार्यो की सौगात देंगे। डॉ. सिंह निर्धारित दौरा कार्यक्रम के अनुसार रायपुर से सवेरे 10.30 बजे हेलीकॉप्टर द्वारा रवाना होकर पूर्वान्ह 11.45 बजे पण्डरापाठ पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री वहां आयोजित विशाल आदिवासी सम्मेलन और स्वास्थ्य शिविर में शामिल होने के बाद अपरान्ह 2.30 बजे रायपुर लौट आएंगे।
डॉ. सिंह पण्डरापाठ में लगभग 17 करोड़ 53 लाख रूपये के 9 कार्यो का लोकार्पण और लगभग 50 करोड़ 16 लाख रूपये के 7 कार्यो का भूमिपूजन करेंगे। मुख्यमंत्री इस मौके पर जिले की विशेष पिछड़ी पहाड़ी कोरवा जनजाति के परिवारों को कंबल वितरित करेंगे। डॉ. सिंह हितग्राहीमूलक विभागीय योजनाओं के तहत् सामग्री का वितरण करेंगे। बगीचा विकास खण्ड में लगभग तीन करोड़ 62 लाख रूपये की लागत से निर्मित चार आश्रम भवनों का लोकार्पण करेंगे। इन आश्रम भवनों में लरंगा ग्राम में 74.03 लाख रूपये की लागत से, रोकड़ापाठ विकास खण्ड के रोकड़ापाठ ग्राम में 95.63 लाख रूपये की लागत से, पसिया ग्राम में 95.63 लाख रूपये की लागत से और कवई ग्राम पंचायत के कुरंवा ग्राम में 97.34 लाख रूपये की लागत से आदिवासी कन्या आश्रम का निर्माण किया गया है। डॉ. सिंह ग्राम पण्डरापाठ के कार्यक्रम में मनोरा विकास खण्ड के तलोरा-ओरडीह ग्राम में लगभग एक करोड़ 58 लाख रूपये की लागत से लावा नदी में तलोरा मार्ग पर निर्मित हाई लेवल ब्रिज का, बगीचा विकास खण्ड के बिमड़ा ग्राम में लगभग दस करोड़ 35 लाख रूपये की लागत से निर्मित विमड़ा से बेलवार सड़क, बगीचा विकास खण्ड के बगीचा ग्राम में लगभग एक करोड़ 28 लाख रूपये की लागत से निर्मित कन्या उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय भवन, कांसाबेल विकास खण्ड के सराईपानी ग्राम में 29.80 लाख रूपये की लागत से हाईस्कूल सराईपानी में निर्मित अतिरिक्त कक्ष, फरसाबहार विकास खण्ड के अंकिरा ग्राम में 38.40 लाख रूपये की लागत से हाईस्कूल अंकिरा में अतिरिक्त कक्ष का लोकार्पण करेंगे।
डॉ. सिंह वहां 50 करोड़ 16 लाख रूपये की लागत से 7 कार्य का भूमि पूजन करेंगे। पण्डरापाठ में वृहद स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इसमें विशेषज्ञ डाक्टरों की सेवाएं लोगो को मिलेगी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया है कि स्वास्थ्य शिविर में पैथोलॉंजी सुविधा, एक्स-रे, कम्प्यूटरीकृत नेत्र जांच, डेंटल कक्ष, हदय रोग की जांच के लिए ईको एवं ई.सी.जी सुविधा उपलब्ध रहेगी। शिविर में रायपुर के नारायणा अस्पताल सहित बिलासपुर, रायगढ़, जांजगीर, अम्बिकापुर सहित जिले के विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी सेवाएं देगें। शिविर में शिशु रोग, स्त्री रोग, नाक-कान एवं गला रोग, हद्य रोग, नेत्र रोग, दंत रोग एवं मेडिसीन डॉक्टर उपलब्ध होगें।   मुख्यमंत्री इस अवसर पर विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को लगभग 122 लाख रूपये की सामग्री का वितरण होगा। इसमें टसर धागाकरण मशीन, ट्रेेक्टर ट्राली, निःशक्तजनों को कृत्रिम उपकरण जैसे श्रवण यंत्र, व्हील चेयर, छड़ी, सोलर लालटेन, कृषि पंप, कृषि उपकरण, बैल जोड़ी, विशेष आवश्यकता वाले स्कूली बच्चों को अध्ययन सामग्री, स्वरोजगार के लिए लोन इत्यादि का वितरण किया जायेगा।


 

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छत्तीसगढ़ उम्मीदों पर खरा उतरा – रायपुर में विश्व हॉकी लीग 2015 का हुआ समापन


मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह राजधानी रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में आयोजित विश्व हॉकी लीग 2015 के समापन समारोह में शामिल हुए। उन्होंने इस अवसर पर आस्टेलिया और बेल्जियम के बीच खेले गए रोमांचक फाईनल मैच का अवलोकन किया। हजारों हॉकी प्रेमी दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम में डॉ. रमन सिंह ने दोनों टीमों का उत्साह बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने राज्य में पहली बार हुए इस विश्व स्तरीय हॉकी महाकुंभ के आयोजन में सहभागी बनी सभी टीमों के साथ-साथ समस्त सहयोगी विभागों, संस्थाओं और प्रदेश के खेल प्रेमी दर्शकों के प्रति आभार प्रकट किया। इस अवसर पर स्टेडियम में लोक निर्माण मंत्री श्री राजेश मूणत, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री भईया लाल राजवाड़े, छत्तीसगढ़ युवा आयोग के अध्यक्ष कमलचंद भंजदेव और विधायक श्री नवीन मारकण्डेय भी इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि हॉकी के खेल को और भी अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की विशेष पहल पर छत्तीसगढ़ में पहली बार इस प्रकार का अंतर्राष्ट्रीय आयोजन हुआ। राज्य सरकार के खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहयोग से हॉकी इंडिया और अंतर्राष्ट्रीय हॉकी फेडरेशन द्वारा आयोजित दस दिवसीय इस खेल महाकुंभ में भारत, अर्जेन्टिना, कनाडा, जर्मनी, इंग्लैंड, ऑस्टेªलिया, नीदरलैंड और बेल्जियम की टीमों ने हिस्सा लेकर अपने शानदार खेल कौशल का प्रदर्शन किया। इन टीमों के बीच खेले गए विभिन्न मैचों का सीधा प्रसारण एक निजी कम्पनी के टेलीविजन स्पोटर््स चैनल द्वारा दुनिया भर में किया गया। इससे विश्व के खेल मानचित्र पर छत्तीसगढ़ को एक नई पहचान मिली। यह भी उल्लेखनीय है कि राजधानी रायपुर में प्रदेश सरकार द्वारा पिछले वर्ष अगस्त माह में बनवाए गए अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में विश्व हॉकी लीग का यह पहला आयोजन था। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने पिछले महीने की 31 तारीख को राजधानी रायपुर में लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय एकता दौड़ में इस हॉकी स्टेडियम का नामकरण उनके नाम पर करने की घोषणा की थी। स्टेडियम में विश्व हॉकी लीग फाईनल का शुभारंभ 27 नवम्बर को प्रदेश के राज्यपाल श्री बलरामजी दास टंडन और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा ट्रॉफी का अनावरण करते हुए किया गया था।

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने यहां विश्व कप हॉकी लीग के विजेता आस्ट्रेलिया टीम के खिलाड़ियों को वर्ल्ड कप की ट्राफी देकर सम्मानित किया और अपनी शुभकामनाएं दी। राजधानी रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में आयोजित स्पर्धा में आस्ट्रेलिया नेे बेल्जियम की टीम को 2-1 से हराया। बेल्जियम को रजत पदक प्राप्त हुआ। वहीं नीदरलैण्ड को हराकर टीम इंडिया ने कांस्य पदक जीता। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री भईया लाल राजवाड़े, लोक निर्माण मंत्री श्री राजेश मूणत, रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ ओलम्पिक संघ के महासचिव श्री बलदेव सिंह भाटिया सहित गणमान्य नागरिक एवं खेलप्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


 

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