प्रदेश में स्वास्थ्य संस्थाएँ


वर्तमान में प्रदेश में 24 जिला चिकित्सालय, 16 सिविल अस्पताल, 155 सामुदायिक केन्द्र, 792 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, 5180 उप स्वास्थ्य केन्द्र, 31 सिविल डिस्पेंसरी (शहरी) 10 शहरी परिवार कल्याण केन्द्र, 03 कुष्ठगृह एवं चिकित्सालय तथा 01 पाॅली क्लीनिक संचालित है


मातृ स्वास्थ्य


  • सुरक्षित मातृत्व और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में जननी सुरक्षा योजना संचालित की जा रही है।
  • वर्ष 2002-03 में संस्थागत प्रसव 79,830 था जो की बढ़ कर वर्ष 2015 में फरवरी तक 3,32,262 हो चुके है जो उस समय की संस्थागत प्रसव के चार गुना है।
  • कुल संस्थागत प्रसव के 80 प्रतिशत प्रसव शासकीय अस्पतालों हुए है।
  • 84 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा सभी जिला चिकित्सालयों व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में 24 घंटे प्रसूति सेवाओं की व्यवस्था की गई है।
  • इस वर्ष प्रदेश के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में 24ग7 प्रसूति की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
  • प्रदेश में आपात कालीन प्रस्तुति सेवाओं को गुणवत्तापरक बनाने के उद्देश्य से सभी जिला अस्पतालों और चिन्हित विकासखण्डों में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों को प्रथम संदर्भन इकाई के रूप में विकसित किया जा रहा है।
  • प्रदेश के 16 ब्लड बैंक और 56 ब्लड स्टोरेज सेंटर के माध्यम से जिला अस्पताल तथा 18 सामुदायिक केन्द्रों में भी रक्त आधान की सुविधा उपलब्ध हो चुकी है।


102 महतारी सेवा एक्सप्रेस


  • माता एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा13 अगस्त 2013 को जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम अंतर्गत महतारी एक्सप्रेस की सुविधा प्रारंभ की गई है।
  • 300 वाहनों के माध्यम से प्रसवकालीन गर्भवती महिला को प्रसव हेतु तथा 1 वर्ष उम्र तक के बच्चों को उपचार हेतु घर से शासकीय अस्पताल, रिफरल पर उच्च अस्पताल एवं उपचार उपरांत घर वापसी के लिये निःशुल्क परिवहन सुविधा।
  • फरवरी 2015 तक 5 लाख 68 हजार माताओं एवं बच्चों को निःशुल्क सेवा प्रदान की गई है।
  • संचालनालय स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से प्रदेश में वर्ष 2009-10 में प्रथम संदर्भन इकाईओं का शुभारंभ किया गया ।
  • उस समय मात्र 8 जगह शासकीय अस्पतालों में सिजेरियन आॅपरेशन के माध्यम से प्रसव की सुविधा उपलब्ध थी
  • इस वर्ष 39 स्वास्थ्य संस्थाओं में प्रथम संदर्भन इकाईया स्थापित कर सीजेरियन आॅपरेशन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
  • 2008-09 में शासकीय अस्पतालों में 6407 सिजेरियन होते थे जो इस वर्ष अब तक 10,867 हो चुके है।

शिशु स्वास्थ्य


  • नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई स्वीकृत हैं।
  • वर्ष 2011-12 में इस योजना का प्रारंभ किया गया था
  • मार्च 2014 तक कुल 5 जगह पर यह केन्द्र संचालित थे जिसमें वृद्धि करते हुए 11 केन्द्र क्रियाशील किए गए हैं।
  • अन्य 5 स्थानों पर जल्द ही केन्द्रों का प्रारंभ किया जा रहा है।
  • इस वर्ष 6334 बच्चों को इसका लाभ हुआ है।
  • नवजात शिशु गहन इकाई के छोटे रूप NBSU 16 विकासखण्डों में तथा 289 जगह पर NBCC क्रियाशील किया गया है।

108 संजीवनी एक्सप्रेस


  • देश में बढ़ते हुये दुर्घटना एवं चिकित्सकीय आकस्मिकता पर प्राथमिक उपचार सहित एम्बुलेंस की सुविधा प्रदेश की जनता को निःशुल्क उपलब्ध कराये जाने 25 जनवरी 2011 से 108 संजीवनी एक्सप्रेस की सुविधा 172 वाहनों के माध्यम से प्रारंभ की गई थी।
  • वर्तमान में प्रदेश के सभी जिलों में 240 वाहनों के माध्यम से यह सुविधा प्रदान की जा रही है।
  • योजना प्रारंभ से 15 फरवरी 2015 तक लगभग 8 लाख से अधिक आकस्मिकता पर प्राथमिक उपचार प्रदान कर संजीवनी एक्सप्रेस के माध्यम से चिकित्सालय पहुंचाया गया है।
  • इस वर्ष 2 लाख 24 हजार व्यक्तियों को लाभान्वित किया गया।

टीकाकरण -इन्द्रधनुष


  • प्रदेश में टीकाकरण के बेहतर प्रतिशत को प्राप्त करने के लिए जिन जिलों में सम्पूर्ण टीकारण का प्रतिशत 45ः से कम है ऐसे 08 जिलों में इस वर्ष विशेष कार्यक्रम चलाया जायेगा।
  • वर्ष 2001 में छत्तीसगढ़ में इन्द्रधनुष अभियान के नाम से अभियान प्रारंभ किया गया था।
  • उसी तर्ज पर टीकारण से छूटे या अधूरे रूप से टीकाकरण किये गये सभी शिशुओं का टीकाकरण कार्यक्रम पल्स पोलियों अभियान के स्वरूप पर चलाया जायेगा।
  • भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ शासन के अभियान इन्द्रधनुष को अपनाते हुए सम्पूर्ण देश में इस मिशन इन्द्रधनुष के नाम से लागू करने का निर्णय लिया है।

टीकाकरण -पेंटावेलेन्ट


  • वर्ष 1998-99 में सम्पूर्ण टीकारण का 21 प्रतिशत था जो वर्ष 2008 में 57.03 प्रतिशत था जो 2012-13 में 74.9 प्रतिशत है।
  • 20 मार्च 2015 को टीकाकरण कार्यक्रम अंतर्गत नई पहल के तौर पर पेंटावेलेन्ट वैक्सीन कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है।
  • इसके अंतर्गत 5 बीमारियाँ डिफथेरिया, परट्यूसिस, टेटनस, हेपेटाइटिस बी और हिमोफिलस इन्फ्लूएंजा बी के विरूद्ध इंजेक्शन के माध्यम से टीकाकरण करते हुए शिशु को इन बीमारियों से बचाया जायेगा।
  • इस कार्यक्रम में प्रति शिशु लगभग 400 रूपये की राशि का शासन द्वारा व्यय किया जा रहा है सामान्यतः बाजार में 750 रूपये का व्यय हितग्राही को करना पड़ता है इसकी बचत होगी तथा हर किसी को इसका लाभ मिलेगा।

स्वास्थ्य विभाग


स्वास्थ्य सूचकांकों में उल्लेखनीय उपलब्धियां

  • राज्य में शिशु मृत्यु दर वर्ष 2001 में 76 प्रति हजार जीवित जन्म थी वह अब घट कर 46 प्रति हजार जीवित जन्म हो गई है।
  • माता मृत्यु दर 2001 में 407 प्रति लाख थी वह अब घट कर 244 प्रति लाख हो गयी है।
  • मृत्य दर 8.8 से घटकर 7.3 हो गयी है।

मुख्यमंत्री शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम

  • छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य जिसने मुख्यमंत्री शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रारंभ किया।
  • 27 जनवरी 2012 को प्रदेश के दो शहरों बिलासपुर और राजनांदगांव से प्रारंभ। 21 जून 2012 से प्रदेश के 11 शहरों (नगर पालिक निगमों) में मुख्यमंत्री शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम का संचालन।

राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन


  • छत्तीसगढ़ सरकार के इस कार्यक्रम को भारत सरकार द्वारा अपनाकर पूरे देश में 20 मई 2013 से राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन की शुरुआत।
  • वर्तमान में प्रदेश के 19 शहरों रायपुर, कोरबा, दुर्ग, भिलाई, रायगढ़, अंबिकापुर, चिरमिरी, बिलासपुर, राजनांदगांव, धमतरी, मुंगेली, नैला-जांजगीर, कांकेर, भाटापारा, महासमुंद, कवर्धा, बीरगांव, चरौदा-भिलाई और जगदलपुर में राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन संचालित।
  • वर्तमान में प्रदेश के 19 शहरों 30 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 250 स्वास्थ्य सुविधा केंद्र, 3735 शहरी मितानिने और 3200 से अधिक महिला आरोग्य समितियां संचालित।
  • अर्बन स्लम में व्याप्त स्वास्थ्य विसंगतियों के निराकरण तथा जल जनित रोग, अतिसार नियंत्रण, पीलिया नियंत्रण, टीकारण, श्वसन तंत्र की बीमारियों का नियंत्रण, पोषण आहार संबंधी सेवाओं प्रसूति सेवाओं को विस्तारित कर विभिन्न संक्रामण बीमारियों के नियंत्रण कार्यक्रम का सुदृढ़ीकरण किया गया है।
  • शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से निर्धारित दिवसों में टीकाकरण सत्रों का आयोजना, शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार तथा शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रसूति व परिवार कल्याण की सेवाओं की प्रदायगी आरंभ की गई है।
  • शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत प्रसूति सेवाओं तथा बाह्यरोगी मरीजों की संख्या में विगत दो वर्षो में वृद्धि दर्ज की गई है।
  • शहरी झुग्गी बस्ती वाले इलाकों में मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से बुनियादी स्वास्थ्य सेवा और संदर्भन सेवाओं का विस्तार किया गया है।
  • शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य सम्बन्धी सेवाओं के बेहतर संचालन और रिकॉर्ड संधारण के लिए 275 शहरी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (ए.एन.एम.) को कम्प्यूटर टेबलेट प्रदान किया गया है।

निःशुल्क जेनेरिक दवाइयां


  • प्रदेश के सभी शासकीय अस्पतालों में मरीजों को निःशुल्क जेनेरिक दवाएं प्रदान करने की व्यवस्था के तहत राज्य में 15 अगस्त 2013 को सभी शासकीय अस्पतालों में फ्री ड्रग पालिसी एवं जेनेरिक मेडिसिन लागू।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ‘‘चिरायु योजना’’


  • 15 अगस्त 2014 से राज्य में शून्य से 15 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चिरायु योजना का शुभारम्भ।
  • बच्चों में तीस प्रकार की बीमारियों जैसे जन्मजात विकलांगता, कुपोषण, विकास की कमी एवं बाल स्वास्थ्य से सम्बन्धी दोषों का परीक्षण ।
  • प्रदेश के प्रत्येक विकास खण्ड में चार सदस्यीय दो - दो चिरायु दलों का गठन .
  • एक चिरायु दल में एक महिला और एक पुरुष आयुष चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट और एक ए.एन. एम.।
  • प्रदेश भर के सभी विकास खण्डों में 292 चिरायु वाहनों द्वारा आंगनबाड़ी और स्कूलों में जाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण।
  • इसके अंतर्गत कुल 15896 आंगनबाड़ी केन्द्रों तथा 26853 स्कूलों जो कि 12322 ग्रामों के कुल 31 लाख 48 हजार बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
  • इनमें से 5 लाख 52 हजार बच्चों का उपचार किया गया।
  • इसमें से 1 लाख 52 हजार बच्चों को संदर्भित किया गया।
  • 66640 बच्चों को विभिन्न प्रकार की बीमारियों के लिए आगामी उपचार एवं सहायता की आवश्यकता दर्ज हुई है।
  • इन संदर्भित बच्चों के लिए 6 जगह पर उपचार एवं सहायता केन्द्र स्थापित किये जायेंगे।
  • RSBY अंतर्गत पंजीकृत अस्पतालों में शल्य चिकित्सा की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाने की योजना है।

मोबाइल मेडिकल यूनिट


  • प्रदेश के 14 वामपंथ उग्रवाद प्रभावित(LWE) जिलों के लिए 37 मोबाइल मेडिकल यूनिट (डडन्) का संचालन।
  • राज्य के दूरस्थ इलाकों में मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से प्रतिदिन औसतन 50 मरीजों को इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है

‘‘नवजीवन’’ वेब पोर्टल की शुरुआत


  • मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना, मुख्यमत्री बाल श्रवण योजना और संजीवनी कोष योजना को ऑनलाइन करने के लिए 15 अक्टूबर 2014 को नवजीवन वेबपोर्टल की शुरुआत।

महामारी नियंत्रण के लिए एस एम् एस आधारित रिपोर्टिंग सिस्टम ‘‘सचेत’’


  • प्रदेश में महामारियों के भौगोलिक वितरण का पता लगाकर उचित और प्रभावी कार्य योजना बनाने के उद्देश्य से 15 अक्टूबर 2014 को एस एम् एस आधारित रिपोर्टिंग सिस्टम सचेत की शुरुआत. इस ऑनलाइन पोर्टल प्रदेश के सभी निजी और शासकीय चिकित्सकों को जोड़ा गया है।

मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना


  • छत्तीसगढ़ के मूल निवासी शून्य से 15 वर्ष आयु के हृदय रोग से पीडि़त बच्चों के इलाज के लिए जुलाई 2008 से मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना का संचालन।
  • 15 अक्टूबर 2014 से इस योजना को ऑनलाइन करने के लिए नवजीवन वेब पोर्टल की शुरुआत।
  • योजना का लाभ उठाने के लिए निःशुल्क आवेदन जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी/सिविल सर्जन में उपलब्ध साथ ही नवजीवन वेब पोर्टल से आवेदन डाउनलोड करने की सुविधा।
  • प्रदेश के 6 अनुबंधित अस्पतालों में सात प्रकार के बाल हृदय रोगों के इलाज की सुविधा।
  • योजना के तहत अब तक करीब 4 हजार बच्चों का निःशुल्क इलाज।
  • आपरेशन के लिए 1.5 से 1.8 लाख तक की आर्थिक सहायता।

मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना


  • छत्तीसगढ़ के मूल निवासी एक वर्ष से 5 वर्ष आयु के श्रवण बाधित बच्चों के लिए वर्ष 2010 से योजना कि शुरुआत।
  • अब तक 104 बच्चों का निःशुल्क काक्लियर इम्प्लांट।
  • मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना लागू करने वाला देश का प्रथम राज्य छत्तीसगढ़।
  • राजधानी रायपुर के अम्बेडकर चिकित्सालय में इलाज कि सुविधा।
  • 15 अक्टूबर 2014 से इस योजना को ऑनलाइन करने के लिए नवजीवन वेब पोर्टल की शुरुआत।
  • योजना का लाभ उठाने के लिए निःशुल्क आवेदन जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ध्सिविल सर्जन में उपलब्ध साथ ही नवजीवन वेब पोर्टल से आवेदन डाउनलोड करने की सुविधा।
  • योजना के तहत गरीबी रेखा श्रेणी (बी.पी.एल.) परिवार को 6 लाख रूपये और गरीबी रेखा से उपर (ए.पी.एल) श्रेणी के परिवार को चार लाख की आर्थिक सहायता का प्रावधान।

संजीवनी कोष योजना


  • प्रदेश के गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले और मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के कार्ड धारक परिवारों के लिए उपचार सुविधा।
  • हितग्राहियों को तीस जटिल की बीमारियों के लिए आर्थिक सहायता।
  • सिर की चोट के इलाज के लिए 2 लाख रूपये और गुर्दे के इलाज के लिए से 3 लाख रूपये तक आर्थिक सहायता का प्रावधान।
  • इलाज के लिए 21 निजी अस्पतालों से अनुबंध।
  • वर्ष 2014-15 में 2156 हितग्राही लाभान्वित, वर्ष 2004 से अब तक 8 हजार से अधिक रोगी लाभान्वित।

बाल मधुमेह सुरक्षा योजना


  • बाल मधुमेह सुरक्षा योजना लागू करने वाला देश का पहला राज्य।
  • शून्य से 15 वर्ष आयु के मधुमेह पीडि़त बच्चों को निःशुल्क इन्सुलिन प्रदाय करने वर्ष 2015 से योजना की शुरुआत।
  • 2015-16 के बजट में 3 करोड़ रूपये का प्रावधान।

फ्लोरोसिस रोकथाम और नियंत्रण योजना


  • प्रदेश के चिन्हांकित स्थानों के निवासियों में पानी में फ्लोराइड की अधिकता से हो रहे फ्लोरोसिस रोग के इलाज के लिए वर्ष 2015 से योजना कि शुरुआत।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना


  • प्रदेश वासियों के लिए सेहत की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लागू इस योजना से अब तक 8.5 लाख हितग्राहियों को स्मार्ट कार्ड के माध्यम से 620 करोड़ रूपये का इलाज।

सिकल सेल नियंत्रण


  • राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2004 में सिकल सेल के प्रति जागरूकता के लिए रायपुर के जवाहर लाल नेहरू शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में दीनदयाल उपाध्याय सेंटर फॉर जेनेटिक डिसीज कि स्थापना की गयी है।
  • वर्ष 2007 से इस बीमारी के सही आकलन के लिए तीन से लेकर 15 वर्ष के बचों का घर घर जाकर परीक्षण किया जा रहा है।
  • वर्ष 2013 में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में सिकल सेल संस्थान की स्थापना की गयी। यहाँ अस्थायी ओ.पी.डी. का संचालन भी किया जा रहा है।
  • इस वर्ष के बजट में सिकल सेल कि रोकथाम और इलाज के लिए 20 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है।

ब्लड बैंक एवं ब्लड स्टोरेज सेंटर


  • राज्य निर्माण के समय प्रदेश में 07 ब्लड बैंक संचालित थे जो वर्तमान में 16 हो गये हैं।
  • प्रदेश के सभी जिलों में ब्लड बैंक शुरू करने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
  • वर्तमान में प्रदेश में 54 ब्लड स्टोरेज सेंटर संचालित हैं।

मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम


  • राज्य के दूरस्थ ग्रामों में मलेरिया रोड के त्वरित निदान हेतु वर्ष 2014-15 में सामुदायिक आधारित मलेरिया रोड के निदान हेतु 84 अतिसंवेदनशील विकासखण्डों में यह योजना नवम्बर 2014 में प्रारंभ की गई।
  • फैल्सिपैरम मलेरिया से होने वाली मृत्यु को रोकने के लिए 36995 मितानिनों को रैपिड डायग्नोस्टिक स्टेट से रोग का निदान एवं उपचार की विधि का प्रशिक्षण दिया गया।
  • मितानिनों के पास 1 लाख आर.डी. टेस्ट एवं 244600 ए.सी.टी. किट उपलब्ध कराई गई । इस तरह से गांव-गांव में ही मलेरिया की जांच एवं उपचार की व्यवस्था की गई।
  • अब तक मितानिन द्वारा 21266 मलेरिया पीडि़तों का उपचार किया गया तथा 5661 गंभीर रोगियों का स्वास्थ्य संस्थानों में संदर्भन किया गया।
  • इस वर्ष इस योजना को पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है।
  • छत्तीसगढ़राज्य निर्माण वर्ष 2000 में मलेरिया का वार्षिक परजीवी सूचकांक 16.8 था जो की वर्ष 2014 में घट कर 4.72 हुआ है।
  • वर्ष 2000 में रक्त पट्टी धनात्मक दर 8.8: था जो घट कर 2.98 हुआ है।

104 आरोग्य परामर्ष सेवा


  • दूरभाष के माध्यम से स्वास्थ्य परामर्श सेवा, मनोवैज्ञानिक परामर्श सेवा, शिकायत और स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं की जानकारी आम जनता को उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 104 आरोग्य परामर्श सेवा की शुरूआत की गई है।
  • इस सेवा का प्रारंभ 23 सितम्बर 2013 को किया गया।
  • यह सेवा 24X7 और 365 दिन कार्यात्मक है जिसमें सभी राष्ट्रीय पर्व एवं त्यौहार शामिल हैं।
  • प्रदेश का कोई भी नागरिक 104 नम्बर पर सम्पर्क करके इस सेवा का निःशुल्क लाभ ले सकता है।
  • अब तक इस नम्बर पर 3 लाख 52 हजार 728 कॉल्स दर्ज की गई है।

1099 मुक्तांजलि वाहन


  • 1 मई 2013 को इस सेवा की सेवा शुरूआत की गई वर्तमान में 59 शव वाहिका संचालित है।

मितानिन कार्यक्रम


  • जन समुदाय के बीच सेहत को लेकर जागरूकता बढ़ाने और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए मितानिन कार्यक्रम कि शुरुआत।
  • वर्तमान में 66 हजार से अधिक मितानिन अपनी सेवाएँ दे रही हैं।
  • मितानिनों के समग्र विकास हेतु वर्ष 2011 में मुख्यमंत्री मितानिन कल्याण कोष की शुरुआत।
  • करीब 69 हजार से अधिक ग्रामीण और शहरी मितानिनों और प्रशिक्षकों को जीवन बीमा से जोड़ा गया।
  • जिसके तहत मितानिनों का जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा, शिक्षा प्रोत्साहन, मितानिनों के बच्चों को छात्रवृत्ति आदि प्रदान करने का कार्य प्रारंभ किया गया है।
  • अब तक 242 मृत्यु प्रकरणों को बीमा राशि (50 हजार रूपये की दर से) का भुगतान।
  • मितानिनों के 13 हजार 620 बच्चों को वार्षिक छात्रवृत्ति (1200 रूपये की दर से) प्रदान की गई।
  • 56806 मितानिनों को स्वावलम्बन पेंशन निधि से जोड़ा गया है।
  • अब तक 6167 मितानिनों को शिक्षा प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है।
  • अब तक 971 मितानिनों और प्रशिक्षकों को मातृत्व सहायता राशि प्रदान की गई है।
  • 4036 मितानिनों को आजीविका निर्माण प्रशिक्षण दिया गया।

चिकित्सा शिक्षा


  • राज्य निर्माण के पहले प्रदेश में एक ही चिकित्सा महाविद्यालय था वर्तमान में छः चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, जगदलपुर, राजनांदगांव में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय और एक निजी क्षेत्र का चिकित्सा महाविद्यालय दुर्ग में संचालित है।
  • राज्य निर्माण के समय मेडिकल की केवल 100 सीटें थी जो वर्ष 2014-15 में 650 हो गई है।
  • रायपुर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्थापना की गयी है।
  • राज्य निर्माण के समय प्रदेश में एक भी दन्त चिकित्सा महाविद्यालय नहीं था। वर्तमान में एक शासकीय और पांच निजी दन्त चिकित्सा महाविद्यालय संचालित हैं।
  • वर्तमान में दंत चिकित्सा के लिए 600 सीटें उपलब्ध हैं।
  • राज्य निर्माण के समय प्रदेश में एक भी फिजिओथेरेपी महाविद्यालय नहीं था। वर्तमान में 3 फिजिओथेरेपी महाविद्यालय(एक शासकीय और दो निजी) संचालित है।
  • वर्तमान में शासकीय फिजिओथेरेपी महाविद्यालय में 50 सीटें उपलब्ध हैं।
  • राज्य निर्माण के समय प्रदेश में केवल 04 जी.एन.एम. नर्सिंग स्कूल थे वर्तमान में इनकी संख्या 57 है।
  • प्रदेश में संचालनालय आयुर्वेद, योग तथा प्राकृतिक, यूनानी सिद्धि एवं होम्योपैथी (आयुष) के अंतर्गत चार आयुर्वेद महाविद्यालय (2 शासकीय तथा 2 निजी) तीन होम्योपैथी (निजी) यूनानी और प्राकृतिक चिकित्सा के एक एक निजी महाविद्यालय संचालित हैं।
  • वर्तमान में प्रदेश में आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालयों में 240, होम्योपैथी चिकित्सा महाविद्यालयों में 200, यूनानी चिकित्सा महाविद्यालय में 40 तथा योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय में 50 सीटें उपलब्ध हैं।
  • एक ही छत के नीचे जनसामान्य को आयुष चिकित्सा पद्धति का लाभ प्रदाय किए जाने हेतु 15 जिला एलौपैथिक चिकित्सालयों में आयुष विंग, 22 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में सस्पेशलाईज्ड थेरेेपी संटर एवं 24 सामुदायिक/प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में स्पेशिलिटी क्लीनिक की स्थापना की गई है।
  • साथ ही आदिवासी जिलों के 399 सामुदायिक/प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में आयुष चिकित्सक एवं फार्मासिस्ट के पदों का सृजन करते हुए बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
  • वित्तीय वर्ष 2008-09 में 25 विकासखण्डों में पायलेट प्रोजेक्ट के तहत 25 आयुर्वेद ग्राम चिन्हांकित किये गये।
  • आयुर्वेद ग्राम की सफलता को देखते हुए वित्तीय वर्ष 2009-10 में राज्य के 121 विकासखण्डों, वर्ष 2011-12 में 292, वर्ष 2013-14 में 450 एवं वर्ष 2014-15 में 500 ग्रामों में उक्त योजना राज्य सरकार द्वारा लागू की गई है।

खाद्य एवं औषधि प्रषासन


  • औषधि, खाने-पीने की चीजों, सौंदर्य प्रसाधनों की जांच के लिए रायपुर में खाद्य एवं औषधि प्रशिक्षण प्रयोगशाला संचालित है।
  • विभाग द्वारा समय-समय पर खाद्य पदार्थ निर्मित करने वाली फैक्ट्रियों, प्रसंस्करण इकाईयों, दुकानों और होटलों आदि से नमूने एकत्रित किये जाते हैं। इन नमूनों का परीक्षण कर मिलावट का पता लगाया जाता है।
  • किसी भी प्रकार की मिलावट, अनियमितता आदि की पुष्टि होने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम अंतर्गत कार्यवाही की जा रही है जिसमें 6 माह से 6 वर्ष तक कारावास एवं 10 लाख रूपये के जुर्माना का प्रावधान है।