लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण


108 संजीवनी एक्सप्रेस :-संजीवनी एक्प्रेस के चार साल पूरे , साढ़े सैट लाख से अधिक मरीजों को मिला फायदा



छत्तीसगढ की जीवन रेखा

छत्तीसगढ़, राज्य निर्माण के पूर्व से ही कतिपय भौगोलिक व राजनैतिक कारणों से सदैव ही स्वास्थ्य सेवाओं की दृष्टि से अत्यंत पिछड़ा क्षेत्र रहा है। 1 नंवबर 2000 को राज्य निर्माण के पश्चात राज्य में स्वास्थ्य सेंवाओं के बेहतरी के लिए अनेकानेक प्रयास किए गए। श्री अमर अग्रवाल जी द्वारा 2008 में स्वास्थ्य मंत्री का पदभार ग्रहण करते ही राज्य के सुदूर अंचलों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा एवं आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के विस्तार तथा क्रियान्वयन पर सर्वप्रथम ध्यान केेन्द्रित किया गया। इसी कड़ी में इमरजेंसी मैनेजमेंट एंड रिसर्च संस्थान के सहयोग से 22 सितंबर 2011 को 108 संजीवनी एक्सप्रेस निःशुल्क अभिनव एम्बुलेंस सेवा का शुभारंभ किया गया है।

संपूर्ण राज्य में किसी भी आपात स्थिति में सड़क दुर्घटना, प्रसव संबंधी परेशानी, हार्ट अटैक, जानवरों के काटने, सर्पदंश, आत्महत्या के प्रयास, मलेरिया, मधुमेह से संबंधित गंभीर स्थिति में एम्बुलेंस बुलाने के लिए 108 डायल किया जा सकता है। यही नहीं किसी भी प्रकार की हिंसा, चोरी, डकैती, हत्या, रैगिंग, घरेलू हिंसा तथा अग्नि दुर्घटनाओं के लिए भी इसी नम्बर पर कॉल कर सहायता प्राप्त की जा सकती है। घायलों और गंभीर मरीजों को कम से कम समय में अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस की तैनाती इस प्रकार की जाती है कि शहरी क्षेत्रों में 15 मिनिट और ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतम आधे घंटे के भीतर एम्बुलेंस पहुंच जाए। यह पूर्णतः वातानुकूलित और अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित एम्बुलेंस है। जन सामान्य मोबाईल अथवा किसी भी लैंडलाईन से बिना एसटीडी कोेड के टोल फ्री नंबर 108 डायल कर पूर्णतः निःशुल्क एंबुलेंस सेवा का लाभ ले सकते है। यह सेवा साल के 365 दिन चैबीसों घण्टे उपलब्ध हैं। इसमें अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण,आॅक्सीजन, ब्लडबैंक, सामान्य प्रसव सुविधा, आवश्यक जीवन रक्षक दवाईयों के साथ डाॅक्टर व मेडिकल ट्रिटमेंट स्टाॅफ मौजूद रहता है, जो मौकेे पर पहुंचते ही पीडि़त व्यक्ति का प्राथमिक उपचार आरंभ कर तत्काल अस्पताल पहंुचाते हैं। मरीज को इच्छानुसार निकटतम शासकीय अथवा निजी अस्पताल मे भर्ती सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। अस्पताल में मरीज के पहुंचने के प्रथम 48 घण्टे तक अथवा मरीज के स्वास्थ्य स्थिर होने तक किसी भी तरह का कोई शुल्क नहीं लिया जाता।

सड़क हादसों में गंभीर रूप से घायलों की मौत केवल इसलिए हो जाती है, क्योंकि उन्हें समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका। इसे मानवीय संवेदना की कमी कहें या पुलिस की पूछताछ की औपचारिकताओं से बचने जुगत, व्यक्ति सड़क दुर्घटनाओं सहित विभिन्न प्रकार की आपात परिस्थितियों में घायल की मदद करने के बजाय अपनी राह चल देना ज्यादा पसंद करता है। इन सब परिस्थितियों से निजात दिलाने के लिए स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल जी द्वारा 108 संजीवनी एक्सप्रेस की शुरूआत की गई है।

उपलब्धि

संपूर्ण जिले में 108 संजीवनी एक्सप्रेस एंबुलेंस की कुल 16 इकाईयां संचालित की जा रही है, जो 2662077 जनसंख्या के दायरे में अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रही है। इतने अल्प समय में अब तक कुल 21568 अपातकालीन सेवांएं उपलब्ध कराई गयी हैं जिसमें से 718 पुलिस, 436 अग्नि दुर्घटना, 20414 स्वास्थ्य संबंधी, 8114 प्रसव संबंधी, 1948 सड़क दुर्घटना, 267 हृदय रोग संबंधी, 417 श्वसन रोग संबंधी एवं सामान्य प्रसव सहायता के 50 मामलों में नागरिकों को संजीवनी एक्सप्रेस की सुविधाएं उपलब्ध कराई गयी हैं।

छत्तीसगढ़ में अभी 1 लाख माताओं में 335 और 1 हजार शिशुओं में 54 शिशुओं की मौत जन्म के तीस दिवस के भीतर हो जाती है। यदि उन्हें एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से अस्पताल में प्रसव की सुविधा मिल जाती है, तो राज्य का मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में काफी सुधार आ सकता है और इससे प्रदेश के स्वास्थ्य सूचकांक में निश्चित रूप से सुधार आएगा। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य के क्षेत्र में लागू विभिन्न योजनाओं में से संजीवनी एक्सप्रेस योजना अब तक की सबसे कामयाब और कारगर योजनाओं में से एक है। पूरे प्रदेश में योजना लागू हो जाने के बाद चिकित्सा के अभाव में प्रसव पीड़ा से कराहते किसी मां को अथवा सड़क दुर्घटना में किसी घायल को तड़पते हुए दम नहीं तोड़ना पड़ेगा। लेकिन इस पूरी योजना के क्रियान्वयन में प्रदेश के जागरूक नागरिकों को यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है, कि यह सेवा केवल आपात परिस्थितियों के लिए है।